यह किताब 'जकड़न' अपने आप में एक संकलन है जिसमें इस संकलन के लेखक शौर्य बक्शी द्वारा लिखी गयी कविताएँ लघु कहानी और नाटक मौजूद हैं। इस संकलन के माध्यम से मैने आजकल के युवा पीड़ी के मन में चल रही उनकी व्यक्तिगत भावनाओं और उनके व्यक्तित्व को करीब से जानने और समझने कि कोशिश की हैं। पिछले कई दशकों से हमारे देश में नारीवाद और आर्थिक विकास के चलते काफ़ी बदलाव आया है। इस बदलाव का प्रभाव समाज पर साकारात्मक रहा है या नकारात्मक वह ' जकड़न ' हमें जानने और महसूस करने का मौका देती है।
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