एक इंसान जलन का जहर खुद पीता है और मरने की कल्पना किसी और की करता है। क्या यह संभव है? जलन इर्ष्या रश्क; जो कुछ भी नाम है इसका यह किस प्रकार से काम करती है? यह इंसान के मस्तिष्क के अंदर सूक्ष्म रूप धारण किए रहती है जिसके प्रकट होने मात्र से ही उसके चेहरे का रंग बिगड़ जाता है। यह निजी रिश्तों की परवाह नहीं करती। यह हमेशा गलत दिशा में दागा जाने वाला वह मारक तत्व है जो किसी के भी बसे- बसाए घर को उजाड़ सकती है। यह इंसान को बेदाग नहीं रहने देती। शायद इंसान के अंदर यह अवगुण स्वर्ग के बागीचे में दिए गए एक सर्प की कुटिल सलाह के बाद आदम और हव्वा के द्वारा उस वर्जित फल को खाने के साथ ही आया होगा जिसे हम ज्ञान कहते हैं! इस उपन्यास में जलन की वजह से पति-पत्नी के उजड़ते संसार को मार्मिक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
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