Jalte Hue Chirag

About The Book

समाज की दुर्दशा और आवाम खामोश ..बड़ी हैरत की बात है। .लेकिन ये सब मुमकिन है यहाँ सब कुछ हो सकता है । ये हिंदुस्तान है मेरे भाई । सब्जीवाला अगर एक आलू कम तौल दे तो सब्जी काटने वाले चाक़ू से ही उसका क़त्ल हो जाता है और उसके परिवार वालों को चोर खानदान कह दिया जाता है । गली से घर वालों का निकलना मुश्किल हो जाता है । हर चलता फिरता ताने और तंज़ कसता जाता है. मानो इस आदमी में समाज का बेडा गर्क कर दिया और देश को इससे अपूर्णीय क्षति हुई है....दो आलू किसी का घर बर्बाद करने के लिए काफी हैं और क़त्ल करने वाला बहुत गर्व से सीना चौड़ा कर कहता है ...मैं असत्य बर्दाश्त नहीं कर सकता ...समाज में चोर नहीं पैदा होने चाहिए ....मैंने जिंदगी में कभी कोई भी गलत काम नहीं क्या और गलत देख कर मेरा खून खौल उठता है..मुझे अपने किये पर कोई अफ़सोस नहीं है...शायद एक नेता का जन्म हो रहा है ।
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