रोहित वेमुला एक शानदार लेखक थे और उनका लेखन आधुनिक भारत में जाति की पीड़ादायक हक़ीक़त को बयान करता है। 17 जनवरी 2016 को खुदकुशी कर लेने वाले रोहित ने फेसबुक पर आठ साल के अपने लेखन के दौरान गाज़ा से लेकर गाज़ियाबाद तक शायद ही कोई मुद्दा हो जिस पर टिप्पणी नहीं की हो। जाति से लेकर गाय की राजनीति तक पर लिखी गई पोस्टों में वे एक गज़ब की काव्यात्मक भाषा और रेडिकल नज़रिए के साथ अपनी बात कहते हैं जिसमें ताज़गी है मुद्दों को सुलझाने की एक ज़िद है और सवाल करने का अपार साहस है।