इस धमाकेदार किताब में सुरज मिलिंद एंगडे जाति से जुड़े गहरे विश्वासों को चुनौती देते हैं और इसकी कई परतों को खोलते हैं। यह इंक़लाबी किताब यह दिखाती है कि जाति किस तरह इंसान की रचनात्मक शक्ति को कुचलती है। ये किताब बताती है कि जाति किस तरह उत्पीड़न के दूसरे रूपों जैसे नस्ल वर्ग और लिंग से खौफनाक रूप से मेल खाती है। यह किताब असमानता पर विचार करने के साथ-साथ एक संघर्ष का आह्वान भी करती है।