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About The Book
Description
Author
‘जय जोहार’ की कहानियाँ हमारे समय के जरूरी सवालों की केवल बानगी मात्र नहीं हैं बल्कि मनुष्य की समस्याएंउसके वजूद की मूल चिंताओं और सरोकारों की हकीकत क्या हैउसे सामने रखती हैं। इन कहानियों में वक्त के बदलाव से जन्म लेती समस्याओं के साथ कई गहरे संदर्भ भी हैं। बाजार की गिरफ्त में समा रही हमारी जीवन शक्तियाँभौगोलिक परिवेशहमारे समय करवट लेती समस्याओं से निपटने के लिए संघर्षजीवन की भीतरी तहों में छिपी निराशा और उस निराशा के बीच जन्मी हिम्मतकरुणा की कई तस्वीरें इस संग्रह की कहानियों में मौजूद हैं।व्हाइट कैंपपत्थरअनुबंधअधखाया फल की कहानियों के पात्र हमसे कहीं-न-कहीं टकरा जाते हैं। समाज में जिस तेजी से बदलाव हो रहे हैंउसी तेजी से छत्तीसगढ़ के लेखकों ने उसे पकड़ा है।महसूस किया है। और उन सवालों को कहानियों में तब्दील किया है। जिन्हें वो रोज़ देखते हैं। सुनते हैं । और अखबारों में पढ़ते हैं । इन कहानियों में दलित-विमर्श से लेकर स्त्री- विमर्शसामाजिक-विमर्श और प्रेम विमर्श भी मौजूद है। यह कह सकते हैं कि इस संग्रह में सामाजिक मूल्य और मानवीय संवदेनाओं को समेटा गया है। ‘अनुबंध’ कहानी आधुनिक समय के परिवारसमाज और उसमें स्थापति मूल्यों को दर्शाती है। ‘इम्तिहान'' कहानी समाज के वृहद आकाश पर अपनी पहचान बनाती है। अपने लिए सभी जीते हैंलेकिन गाँव के बच्चे निरक्षर न रहें। एक स्कूल के लिए खुद को बेचने की संघर्ष गाथा है। ‘लाल फूल-सफेद फूल’ से पता चलता है कि धर्मातरण की हवा बंद नहीं हुई है। ‘सायरन’ कोयला खदानों की काली ज़िन्दगी का भयावह सच की परते उघारती है। ‘ज्ञान का पिटारा’ में गहरी राजनीतिक सोच भी विद्यमान है। हैसियतबाजार में रामधन जैसी कहानियाँ से पता चलता है कि राज्य कितना भी विकसित हो गया होलेकिन मुंशी प्रेमचंद का लम्ही अब भी कई राज्यों में हैं।