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Description
Author
द्रष्टा हो जाना बुद्ध हो जाना है। बुद्धत्व कुछ और नहीं मांगता इतना ही कि तुम जागो और उसे देखो जो सबको देखने वाला है। विषय पर मत अटके रहो। दृश्य पर मत अटके रहो। द्रष्टा में ठहर जाओ। अकंप हो जाए तुम्हारे द्रष्टा का भाव साक्षी का भाव बुद्धत्व उपलब्ध हो गया। और ऐसा बुद्धत्व सभी जन्म के साथ लेकर आए हैं। इसलिए मैं तुमसे कहता हूं बुद्धत्व जन्मसिद्ध अधिकार है। जब चाहो तब तुम उसे उठा लो वह तुम्हारे भीतर सोया पड़ा है। जब चाहो तब तुम उघाड़ लो वह हीरा तुम लेकर ही आए हो; उसे कहीं खरीदना नहीं कहीं खोजना नहीं।