ज़िन्दगी की अपनी एक अलग ही बहर हैचलो चले वहाँ जहां काल्पनाओं का शहर है।हमारा जीवन एक मंझधार की तरह है जिसमें हम सब अलग अलग परिस्थितियों का सामना करते हैँ और कभी जीतने तो कभी हारने की कोशिश में अपना पूरा जीवन व्यतीत करते जाते हैँ।इस जीत और हार की जंग में जीवन का सार् सार्थक करना कहीं ना कहीं अधूरा रह जाता है और हम बस इस मंझधार से जूझते रहते हैँ।सही मायने मे जीवन का अर्थ तब ही सार्थक होगा जब हम सब मिल कर एक दूसरे का साथ देते हुए खुद में खुद को खोजने की जद्दोज़हद करेंगे वास्तविकता में तब ही जीत पाएंगे और सही मायने मे जीत को और जीवन को सार्थक कर पाएंगे।