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Description
Author
धर्म तुम होबुद्ध मील के पत्थर हैं मनुष्य-जाति के इतिहास में। संत तो बहुत हुए मील के पत्थर बहुत थोड़े लोग होते हैं। कभी-कभार करोड़ों लोगों में एकाध संत होता है करोड़ों संतों में एकाध मील का पत्थर होता है। मील के पत्थर का अर्थ होता है उसके बाद फिर मनुष्य-जाति वही नहीं रह जाती। सब बदल जाता है सब रूपांतरित हो जाता है। एक नई दृष्टि और एक नया आयाम और एक नया आकाश बुद्ध ने खोल दिया। बुद्ध के साथ धर्म अंधविश्वास न रहा अंतर-खोज बना। बुद्ध के साथ धर्म ने बड़ी छलांग ली।