सत्य की पहली किरण-: ओशो के प्रखर विचारों ने ओजस्वी वाणी ने मनुष्यता के दुश्मनों पर संप्रदायों पर मठाधीशों पर अंधे राजनेताओं पर जोरदार प्रहार किया। लेकिन पत्र-पत्रिकाओं ने छापीं या तो ओशो पर चटपटी मनगढंत खबरें या उनकी निंदा की भ्रम के बादल फैलाए। ये भ्रम के बादल आड़े आ गये ओशो और लोगों के। जैसे सूरज के आगे बादल आ जाते हैं। इससे देर हुई। इससे देर हो रही है मनुष्य के सौभाग्य को मनुष्य तक पहुंचने में।जीवन की खोज-: जीवन क्या है?उस जीवन के प्रति प्यास तभी पैदा हो सकती है जब हमें यह स्पष्ट बोध हो जाए हमारी चेतना इस बात को ग्रहण कर ले कि जिसे हम जीवन जान रहे हैं वह जीवन नहीं है । जीवन को जीवन मान कर कोई व्यक्ति वास्तविक जीवन की तरफ कैसे जाएगा? जीवन जब मृत्यु की भांति दिखाई पड़ता है तो अचानक हमारे भीतर कोई प्यास जो जन्म-जन्म से सोई हुई है जाग कर खड़ी हो जाती है । हम दूसरे आदमी हो जाते हैं। आप वही हैं जो आपकी प्यास है । अगर आपकी प्यास धन के लिए है मन के लिए है अगर आपकी प्यास पद के लिए है तो आप वही हैं उसी कोटि के व्यक्ति हैं। अगर आपकी प्यास जीवन के लिए है तो आप दूसरे व्यक्ति हो जाएंगे। आपका पुनर्जन्म हो जाएगा।