विजेन्द्र की लोकचेतना और उनका व्यक्तित्व मार्क्सवादी विचारधारा से अनुशासित है। उन्होंने अपनी काव्य-साधना करते हुए मार्क्सवाद से जो आलोक प्राप्त किया उसके प्रकाश में उन्होंने अपनी मान्यताएँ सुनिश्चित कीं। अपनी मान्यता के अनुसार वह भारतीय शब्द लोक को सर्वहारा का समानार्थी मानते हैं। वह लोक के उत्सवधर्मी रूप की अपेक्षा उसके संघर्षधर्मी रूप को रूपायित करते हैं। उनका कहना है कि जो रचनाकार अपने देशकाल की द्वन्द्वात्मक समाजिक गतिकी का कलात्मक निरूपण करता है और यथास्थिति का विरोध करता है वही सच्चे अर्थों में समकालीन है और आधुनिक भी। - अमीर चन्द वैश्य
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