राह शिखाये एक गुण -2 (दोहा)चाह एक राह बने ।राह शिखाये एक गुण ।।गुण की विवशता सब दिखे ।कर्म बनाये पग मन शिख।।दीया की ज्योति सब दिखे ।मन अन्धकार पग छाये ।।अन्धा पग-2 भय धरे ।जग मग भय सो जाये ।।ईश्वर पग पत्थर पूजे ।मां बाप को न पूजे जाये ।।गुरु की महिमा अनमोल पंथ ।जीवन पावन जगमग हो जाये ।।मिट्टी जीवन भय पग धरे ।मिट्टी दुनिया को समा जाये ।।कण्ठ -2 पग देव विराजे ।इन्सान धन्य अमल बन जाये ।।कथा मन मोह माया भय धरे ।जीवन अन्धकार में हो जाये ।।गीता कुरान की सब बात करे।नयना मयल मन हो जाये ।।सीसा पग नयना भींगे ।जीवन संत पग हो जाये ।।इश्क जगे मन प्रेम धरेकर्म ज्योत आलोक हो जाये।।