एक नई रचना को लोकार्पित करते हुए मैं हर्ष का अनुभव कर रही हूँ। रहस्य और रोमांच दोनों को साथ लेकर चलते हुए इस बाल लघु उपन्यास में प्राचीन भारतीय तांत्रिक विद्या की आध्यात्मिक शत्तिफ़ और अर्वाचीन नई अस्त्र-शस्त्र तकनीकों का सामयिक समन्वय कर एक ममतामयी दादी और नन्हीं पोती के पारस्परिक स्नेह पर आधारित कथा प्रस्तुत की गई है। मूल में यही भाव रहा है कि धर्म के मार्ग पर चलने वाला कभी पराजित नहीं होता है।