यह एक आत्मकथात्मक शैली में लिखी गई भावनात्मक कथा है!जिसमें हर शब्द मेरे अनुभवों से निकला हैना कि किसी कल्पना से।यह कहानी कहीं से गढ़ी नहीं गई है —बल्कि इसे जिया गया है!इसीलिए मैं इसकी शैली को मैं कहती हूँ — ईमानदार लेखन!यह एक लड़की की आत्मा की आवाज़ है जिसमें आत्मकथा सामाजिक चिंतन संघर्ष और कवितासभी एक साथ बहते हैं एक ही धार में।ज्वाला की शांत लपट उस स्त्री का रूप है—जो न चीखती है न डरती हैबस धीरे-धीरे स्वयं को जलाती रहती है !ताकि दुनिया में कुछ रौशनी पहुँच!यह कहानी है उस नारी की जो वर्षों से समाज की सीमाओं में बंधी रही चुप रही मगर उसके भीतर एक अग्नि जलती रही — एक ऐसी आग जो न आवाज़ करती है न आक्रोश पर जला देने का माद्दा रखती है।यह किताब उस 'शांत लपट' का बयान है — जो सब कुछ सहती है लेकिन अंदर से टूटती नहीं।
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