ज्योतिष वह प्राचीनतम विज्ञान है जिसका अध्ययन अधिकांश प्राचीन सभ्यताओं में किया गया है। ज्योतिष से जुड़े प्रतीकों को लुप्त हो चुकी सुमेर व सुमात्रा सभ्यताओं में भी देखा गया है। ऐसी अनेक सभ्यताएं जन्म लेकर फली फूली व नष्ट हो गई किंतु ज्योतिष का ज्ञान सभी को था । अतः समस्त संसार में तथा विशेष रूप से भारत में ज्योतिष को अत्यंत सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। भारत में तो इसे ज्ञान का नेत्र ही माना जाता है। डॉ. भोजराज द्विवेदी की यशस्वी लेखनी से रचित ज्योतिष वास्तुशास्त्र हस्तरेखा अंकविद्या रत्नविद्या आकृति विज्ञान यंत्र-तंत्र-मंत्र विज्ञान कर्मकांड व पौरोहित पर लगभग 400 पुस्तकें 3000 से अधिक राष्ट्रीय महत्त्व की भविष्यवाणियां पूर्व प्रकाशित होकर समय-चक्र के साथ-साथ चलकर सत्य प्रमाणित हो चुकी हैं जो ज्योतिष जगत् का एक गौरवपूर्ण कीर्तिमान है। डॉ. द्विवेदी द्वारा हजारों-लाखों भविष्यवाणियां लोगों के व्यक्तिगत जीवत हेतु की गई हैं जो चमत्कारिक रूप से सत्य सिद्ध हुई है ।