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About The Book
Description
Author
मनोज कुमार झा का कविता संग्रह अंतिम आदमी के जीवन पर उसी की भाषा में लिखा गया महत्वपूर्ण दस्तावेज है। देश के गरीबों के बारे में तो बहुत कुछ लिखा गया है लेकिन उन लोगों के जीवन की गहराइयों में धंसकर लिखे गए एक दो ही काव्य देखने को मिले हैं। गाँव के गरीबों की हर रोज की ज़िन्दगी की त्रासदी का जैसा विवरण आपकी कविताओं में है वैसा मैंने पहले नहीं देखा है। सम्भव है इसका कारण यह हो कि जो कुछ हिन्दी में लिखा जा रहा है उसके बारे में जानकारी कम हो। अगर हिन्दी भाषी आपकी शब्दावली से शब्दों का चयन अपनी भाषा में करें तो हिन्दी भाषा अधिक समृद्ध होगी। मेरा आशय आपकी कविताओं में जिन आंचलिक शब्दों और मुहावरों का प्रयोग हुआ है वैसे शब्दों और मुहावरों से है। आपकी भाषा स्थानीयता के दायरे को पारकर संप्रेषित हो सकी है। - सच्चिदानन्द सिन्हा