ध्यान सूत्र-: महाबलेश्वर के प्राकृतिक वातावरण में ओशो द्वारा संचालित ध्यान शिविर के दौरान हुए प्रवचनों व प्रायोगिक ध्यान प्रयोगों का संकलन है यह पुस्तक। शरीर विचारों और भावों की एक-एक परत से ग्रंथियों को विलीन करने की कला समझते हुए ओशो हमें समग्र स्वास्थ्य और संतुलन की ओर लिए चलते हैं।पुस्तक के कुछ अन्य विषय-बिन्दु :• सेक्स उर्जा का सृजनात्मक उपयोग कैसे करें?• क्रोध् क्या है? क्या है उसकी शक्ति?• अहंकार को किस शक्ति में बदलें?• वैज्ञानिक युग में अध्यात्म का क्या स्थान है?कहा कहूँ उस देश की-: तुम्हारे भीतर एक लोक है - अकूत संपदा कारहस्यों काअपरिसीम आनंद काकि उघाड़े जाओ कितने हीकभी पूरे उघाड़ न पाओगे ।ऐसी अनंत शृंखला है उनकी !इतने दीए जल रहे हैं भीतर इतनी रोशनी है ! और तुम अंधेरे में जीरहे हो क्योंकि तुम्हारी आंखें बाहर अटकी हैं। बाहर अंधेरा है भीतर प्रकाश है। बाहर अंधकार है भीतर आलोक है। जो भीतर मुड़ा जिसने अपने आलोक को पहचाना वही बुद्ध है।
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