पहली किताब ‘उड़ान’ के बाद उसी श्रंखला में मेरी यह दूसरी किताब है। इस काम को हाथ में लेते समय ही इस बात का अनुमान था कि अपनी प्रकृति में यह उससे थोड़ा भिन्न और अपेक्षाकृत मुश्किल काम है। इस किताब के संदर्भ में एक बात का उल्लेख जरूरी है कि इसमें संवादों का ज्यादा इस्तेमाल किया गया है लेखिका से ज्यादा पात्र ही कहानी कह रहे हैं। आप इसे मनोयोग से पढ़ें और अपना आशीर्वाद दें। पाठकों का आशीर्वाद रचनाकार की प्रेरणा होता है।