काका हाथरसी ने अपने जीवनकाल में हास्यरस को भरपूर जिया और काका हास्यरस आपस में इतने घुलमिल गए हैं कि हास्यरस कहते ही उनका चित्र सामने आ आता है। उन्होंने कवि सम्मेलनों गोष्ठियों रेडियो और टी.वी. के माध्यम से हास्य-कविता और साथ ही हिंदी के प्रसार में अविस्मरणीय योगदान दिया। उन्होंने साधारण जनता के लिए सीधी और सरल भाषा में ऐसी रचनाएं लिखीं जिन्होंने देश और विदेश में बसे हुए करोड़ों हिन्दी-प्रेमियों के हृदय का छुआ।