आम जनता का अखबारों और आकाशवाणी से भरोसा उठ गया था। असत्य और अर्धसत्य खबरों से जनता का मोहभंग हो गया था। अंडर ग्राउंड खबरों की साख और विश्वनीयता भंग हो गई थी। हर जिले में ऐसे 10-20 लड़के थे जो रात रात भर जग कर हाथ से लिखे कार्बन कॉपी और साइक्लोस्टाईल से खबरें छापते थे। यह कुछ दिनों में घर घर तक पहुँच जाती थी।