कल्लोलिनी एक आधुनिक विदुषी महिला के आत्म-आविष्कार की कहानी है। इस कहानी में उसके अंतर्जगत के विचित्र अनुभवों के वर्णन के समानांतर रूप से प्रवाहित हो रहा है बाहरी जगत से हासिल किये गए उसके अनुभव का वर्णन-जिसके चलते उपन्यास के एक बड़े हिस्से में सत्तर और अस्सी के दशक के असम के बौद्धिक जीवन का चित्रण मिलता है।