कार्तिक रिछारिया जो वर्तमान में उत्तरप्रदेश के झांसी जिले की एक तहसील गरौठा में रहते हैंइनका जन्म गरौठा के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ है इनके पिता का नाम अवधेश रिछारिया माता का नाम संध्या रिछारिया हैइनके दादा जी स्व0 डॉ0 उमाशंकर रिछारिया एक ख्याति प्राप्त वैध थे इनके एक बड़े भाई भी हैं जो वर्तमान में लखनऊ वि0वि0 से बी0ए0एम0एस0 कर रहे हैं कार्तिक बचपन से ही कौशल के विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी रहे हैं एवं वर्तमान में एक शिक्षण संस्थान (स्मार्ट स्टडी क्लासेज गरौठा) में कार्य करते हुए समाज कल्याण का कार्य कर रहे हैं लेखन के अतिरिक्त आप संगीत के क्षेत्र में भी काफी रुचि रखते हैं। कार्तिक का मानना है कि व्यक्ति को अपने जीवन में उन आदर्शों का पालन करना चाहिए जो लोककल्याण की भावना से परिपूर्ण हों जिससे लोगों का अधिक से अधिक कल्याण हो सके। इनका सपना है कि गरौठा क्षेत्र का नाममान वैभव चहुँ दिशाओं में प्रसारित हो और इसके लिए ये अपनी कार्यक्षमता से भी अधिक कार्य करने के लिए तत्पर हैं। इस पुस्तक में लेखक/कवि ने जीवन मां प्रकृति के अतिरिक्त अन्य विषयों पर भी कविताएं लिखी हैं आशा है ये रचनाएं आपको पसंद आएंगीं।
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