“कम में है ज़्यादा” दस हिंदी लघु-कथाओं का संकलन है और यह IIM बैंगलोर के एक प्रोफ़ेसर द्वारा लिखी गई पहली साहित्यिक कृति है। मानवीय अनुभवों और भावनाओं की गहन अभिव्यक्ति के साथ प्रत्येक कहानी पाठकों को मानवता के सबसे बड़े संकट—पर्यावरण—पर गंभीर और कल्पनाशील चिंतन के लिए प्रेरित करती है। न्यूनतावाद नदी पुनर्जीवन जैव-विविधता संरक्षण और जल सततता जैसे विषयों पर आधारित ये कहानियाँ मनोरंजक और रोचक होने के साथ-साथ पाठकों को विचार करने और सार्थक कदम उठाने के लिए भी प्रोत्साहित करती हैं।