This combo product is bundled in India but the publishing origin of this title may vary.Publication date of this bundle is the creation date of this bundle; the actual publication date of child items may vary.ओशो की वाणी आत्म-विद्या की बुद्धत्व प्राप्त वाणी है। उनके प्रवचन पढ़ना एक ध्यान प्रक्रिया है।<br>ऐसी प्रक्रिया जो मन और मन के समस्त द्वंद्वों के पार ले जाती है।<br>मंगेश पाडगांवकर (सुप्रसिद्ध मराठी कवि)आदमी कहां गलत हो गया है? आदमी ने स्वाभाविक और प्राकृतिक होने की हिम्मत नहीं की है। यह उसकी बुनियादी गलती हो गई है। आदमी ने कुछ और होने की कोशिश की है-जजो वह है उससे। पशु पशु हैं पक्षी पक्षी हैं पौधे पौधे हैं। अगर एक गुलाब में कांटे हैं तो वह इस परेशानी में नहीं पड़ा रहता कि मैं बिना कांटों का कैसे हो जाऊं? वह अपने कांटों को भी स्वीकार करता है अपने फूल को भी स्वीकार करता है। उसकी स्वीकृति में कांटों से विरोध और फूल से प्रेम नहीं है। उसकी स्वीकृति में कांटे और फूल दोनों समाविष्ट हैं। इसलिए गुलाब प्रसन्न है क्योंकि उसे कोई अंग काटने नहीं हैं। कोई पक्षी अपने एक पंख को इनकार नहीं करता है और एक को स्वीकार नहीं करता है। और कोई पशु अपनी जिंदगी को आधा-आधा तोड़ कर स्वीकार नहीं करता है पूरी ही स्वीकार कर लेता हैओशपुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदुः मनुष्य एक रोग क्यों हो गया है* ध्यान का अर्थ है: समर्पण टोटल लेट-ग* मन के कैदखाने से मुक्ति के उपा* जिंदगी के रूपांतरण का क्या मतलब है* करुणा अहिंसा दया प्रेम इन सबमें क्या फर्क है?.