साहित्य को समझने और समझाने के लिए एक बहुत स्पष्ट और प्रतिबद्ध दृष्टिकोण का होना आवश्यक है। यह दृष्टिकोण संतुलित और निष्पक्ष होना चाहिए। डॉ- मधुबाला शुक्ल के समीक्षात्मक आलेखों की पुस्तक ‘कसौटी पर कृतियाँ’ को पढ़ते हुए लगता है कि उन्होंने बहुत मेहनत और तार्किक ढंग से कालजयी साहित्यिक कृतियों के विभिन्न पक्षों पर लिखा है।