Katha-Gorakhpur Khand-6 (कथा-गोरखपुर खंड-6) (Hindi Edition)
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जाग मछंदर गोरख आया! कह कर अपने गुरु को ही जगाने वाले महाकवि गुरु गोरखनाथ ने लिखा है नमरो वै जोगी मरौ मरण है मीठा।मरणी मरौ जिस मरणी गोरख मरि दीठायहां गोरख अहंकार को मारने की बात करते हैं। तो गुरु गोरखनाथ की धरती की गमक में गमकती कथा - गोरखपुर की यह कहानियां दिल की घाटियों में संतूर की तरह बजती हैं। कथा - गोरखपुर की खास खासियत यह है कि कमोवेश सभी कहानियां गोरखपुर की माटी की खुशबू में तर-बतर हैं। इन कथाओं में गोरखपुर की माटी ऐसे बोलती है जैसे मां बोलती है। एक से एक नायाब कहानियां हैं इस कथा - गोरखपुर में। गोरखपुर की माटी की महक इन कथाओं में महकती गमकती और इतराती हुई इठलाती मिलती है।
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