‘कठपुतली’ मेरा तीसरा लघुकथा-संग्रह है। पहला लघुकथा-संग्रह ‘हजारों-हजार बीज’ सन 2002 में प्रकाशित हुआ था। रचनाएँ राष्ट्रीय-स्तर की पत्र-पत्रिकाओं में स्थान पा चुकी थीं। तथापि पुस्तक रूप में प्रकाशन के उपरांत पूरी सौ-लघुकथाएँ अमरावती के प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक ‘प्रतिदिन अऽबार’ के रविवारीय-परिशिष्ट में लगातार प्रकाशित हुईं। उससे स्थानीय स्तर पर मिली पहचान और लोकप्रियता के बारेमें मैं अन्यत्र लिऽ चुका हूँ। पाठकों की प्रशंसा तथा प्रतिक्रियाओं से प्राप्त प्रोत्साहन ने दूसरे लघुकथा-संग्रह ‘बोनसाई’ की रचनाओं के लिए अनुकूल आबोहवा और ऽाद-पानी का काम किया। ‘बोनसाई’ को किताबघर प्रकाशन नई दिल्ली द्वारा आयोजित राष्ट्रीय लघुकथा प्रतियोगिता में प्रतिष्ठापूर्ण ‘आर्य स्मृति साहित्य सम्मान 2018’ प्राप्त हुआ। इस पुरस्कार ने लघुकथा-लेऽक के रूप में मेरी राष्ट्रीय-स्तर पर पहचान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। उसके उपरांत आ रहा है यह ‘कठपुतली’ लघुकथा-संग्रह। इस दौरान मैं अपने लघुकथा-लेऽन को कितना तराश पाया लघुकथा को साधने में कितना यशस्वी हो पाया यह साहित्य-मनीषीं और सुधी पाठकों की प्रतिक्रिया से ही पता चलेगा। बहरहाल इतना अवश्य कहना चाहूँगा कि ‘कठपुतली’ की रचनाओं ने मुझे अधिक संतुष्टि प्रदान की। इसका कारण रचनाओं का निम्नलििऽत प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में पूर्व-प्रकाशन तथा नाना प्रकार से महत्व एवं प्रशंसा प्राप्त करना भी है।