कत्ल की रात' की यह कहानियां समयसमाजसरोकार और आम आदमी के खिलाफ सतत चल रहे षणयंत्र को बेपरदा तो करती ही हैं साथ ही इनमें जीवन भी धड़कता है सांस लेने की तरह जरूरी अवयव की तरह।यही रमेश बत्तरा की पहचान है।वरिष्ठ आलोचककथाकार महेश दर्पण इन सभी कहानियों का विश्लेषण करते हुए कहते हैं'हर बार रमेश बत्तरा जिंदगी के बीच से एक नये कथ्य की खोज करते हैं।यहां आप पुरातन प्लॉटवादी कहानी से अलगकहानी का एक नया फ्रेम बनता महसूस करेंगे।' और प्रख्यात लेखक प्रेम जनमेजय लिखते हैं'कत्ल की रात की यह कहानियां रमेश बत्तरा के सारे पात्रों को पुनः हमारे बीच जिंदा करेंगी।' 'कत्ल की रात' की कहानियों को जुटाने का कार्य किया कथाकारपत्रकार हरीश पाठक ने।इस श्रम साध्य कार्य को करने में उन्हें तीन साल लगे।वे लिखते हैं'चुनौती देना और लेना रमेश बत्तरा का संस्कार था।यह चुनौती रचना कर्म की हो या व्यक्ति कर्म की।वे हर मोर्चे पर चुनौती स्वीकार करते नजर आते हैं।' आइए और महसूस कीजिए उस आम आदमी का त्रास दर्दप्यारनफरतउत्साह और उत्सव को जो आम आदमी साहित्य के भी केंद्र में हैजीवन के भी।