अधूरा प्रायश्चित : समाज की विकृत मानसिकता को दर्शाता है। बहुत ही हृदय को दहलाने वाली कहानी है। विकृत मानसिकता एवं बीमारी छोटे बच्चों को भी नहीं छोडती। समाज पर जोरदार प्रहार है। जो लेखिका की भावनाओं को कचोटता है। प्रायश्चित ना कर पाना लेखिका के संवेदनशील मन को दर्शाता है। यह पुस्तक इस प्रकार की 14 कहानियों का संग्रह है। लेखिका डॉ. शोभना बाजपेयी मारू ने अपने आस-पास घटी घटनाओं भोगे हुए यथार्थ एवं कतिपय चरित्रों का वर्णन इस पुस्तक में किया है।