‘उसके पास न तो कोई आवाज़ है और न ही कोई चेहरा उसका कोई नाम या पहचान भी नहीं लेकिन उसका इरादा खतरनाक है।’मुंबई में अकेली रहने वाली युवती रिवाना बनर्जी स्वतंत्र ख़्यालों की है। उसके माता―पिता ही नहीं बल्कि उसका बॉयफ्रेंड भी उसे बेहद प्रेम करता है। वह अपने काम में बिजी है इसलिए उसे दुनियादारी से कोई लेना-देना नहीं। लेकिन उसका जीवन खतरे में है।कोई उसका पीछा कर रहा है उसकी हर हरकत पर नजर रख रहा है और उसे अपने शिकंजे में फंसाने में कोशिश कर रहा है।पहले तो रिवाना को लगा कि उसे हासिल करने की यह किसी जानकार की मूर्खतापूर्ण शरारत है कोई उससे मज़ाक कर रहा है। उसके साथ रहने वाली उसकी मित्र भी यही मानती है। लेकिन वह यह नहीं जानती कि पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए जाल बिछाया है। परन्तु पुलिस उसे क्यों पकड़ना चाहती है? आखिर उस सीधी―सी दिखने वाली कमसिन लड़की ने क्या गुनाह किया है?