अधिकांश लोग ''कौटिल्य अर्थशास्त्र'' को इकोनॉमिकल शास्त्र (वाणिज्य व धन संबंधी अध्ययन ग्रंथ) जानते हैं लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है वस्तुतः यह तो राज्य-व्यवस्था का विवरणात्मक व निर्देशित अध्ययन ग्रंथ है जो विश्व प्रसिद्ध है। रचनाकार कौटिल्य का ही एक नाम चाणक्य था। उन्होंने इस ग्रंथ की रचना कर राज्य-व्यवस्था और प्रजा-पालन का बृहद ज्ञान प्रस्तुत किया है। यह मूल रूप से संस्कृत भाषा में है। प्रस्तुत पुस्तक उक्त शास्त्र का हिंदी अनुवाद है। पाठकों को आसानी से समझ में आ जाए इसके लिए सरल सुस्पष्ट और बोधगम्य भाषा का प्रयोग किया गया है। मेरा मानना है कि इस अथाह ज्ञान रूपी ग्रंथ का अध्ययन मनुष्य को अपने जीवनकाल में एक बार अवश्य करना चाहिए।
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