कविता मेरे लिए मुझ तक पहुँचने का एकमात्र सम्पर्क मार्ग है। यह मार्ग इतना संकरा है कि जहाँ सिर्फ अकेले चला जा सकता है। हर पड़ाव पर दुःख की छाया प्रतीक्षा में रहती है। कविता मेरे अस्तित्व के हर आवरण को भेद कर उसे तहस-नहस करती है। स्वयं को ढकने का यहाँ कोई विकल्प नहीं है। कविता कभी भी मेरे प्रति क्षमाशील नहीं रही - हर बार मुझे गिरेबान से पकड़ कर इसने अपना काम करवाया।
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