Kavitai Kaise Karu


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About The Book

छन्द के बारे में आम धारणा है कि यह जटिल विधा है। इसमें पूर्व निर्धारित नियमों में बँध कर लिखने की बाध्यता होती है फिर इसे सहज जन्मी कविता कैसे कहा जा सकता है ? सामान्यतः यह आरोप सही प्रतीत होता है किंतु इसका कारण केवल ज्ञान का अभाव है। हमारे साहित्य मनीषियों ने मात्राएँ गिन कर ग्रंथ नहीं लिखे उनमें मन में लय गूँजा करती थी उसी लय में निबद्ध होकर शब्द संयोजित हो जाते थे और ग्रंथ बन जाया करता था। मनीषियों के उन्हीं ग्रंथों में समान लय के आधार पर विधान तलाशा गया और विभिन्न छन्दों को अस्तित्व में लाया गया। प्रत्येक छन्दमय रचना इसी तरह सहजता से ही जन्म लेती है।
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