किसी भी कलमकार का यह सपना होता है की उसकी कृतियां कृष्ण स्याही में अंकित होकर एक पुस्तक का रूप ले। आज मुझे वह सपना साकार होता दिख रहा है। इसके लिए मैं ब्लू रोज पब्लिकेशन का तहे दिल से आभार व्यक्त करता हूँ। मैं आभारी हूं अपने मित्रगणों का जिन्होंने मेरे अंदर की यह काव्य के प्रति फितूर को जागृत रखा। उन्होंने मेरी रचनाओं को न सिर्फ सराहा बल्कि इसमें कहां सुधार की आवश्यकता है यह भी बतलाया। उनके स्नेह और समर्थन की वजह से ही आज में अपनी रचनाओं को संकलित करके एक पुस्तक का रूप दे पाया हूं। मैं अपने माता पिता का भी आभार मानता हूं कि उनसे मुझे इसके प्रति समर्थन ही मिला है। उन्होंने मेरी इस लगन की प्रशंसा करते हुए और अच्छा करने का आशीर्वाद दिया। वर्तमान परिदृश्य को देखकर कुछ वर्षों पहले मुझमें कुछ लिखने की रुचि जागृत हुई। धीरे धीरे मेरी यह रुचि काव्य प्रेम में परिवर्तित हो चुकी थी। यह प्रेम दिन प्रतिदिन और गहरा ही होता गया है। आज इस प्रेम ने जो आयाम लिया है वो आपके सामने है। मुझे छुटपन से ही दिनकर निरालानागार्जुनआदि की रचनाएं पढ़ने का शौक था। समकालीन कवियों की बात करे तो डॉ हरिओम पवार और डॉ कुमार विश्वास मेरे चहेते हैं। ये सब मेरे लिए प्रेरणा का अहम श्रोत रहे हैं। आप इन सब की झलक मेरी कृतियों में भी देख सकते हैं। ये काव्य कृतियां मेरे हृदय के बेहद करीब हैं। आज मैंने अपने हृदय के अंशों को आप सबके सामने रखा है। आशा करता हूं कि जितना स्नेह मुझे है आप सब भी इन्हे उतना ही स्नेह देंगे।