Kehkashan - Hindi

About The Book

<p>उमगती ठुमकती हवाओं - सी प्रवाहमयी भाषा में श्री वीर प्रकाश सिंह ने अपनी रचनाओं के माध्यम से बहुत से संवेदनशील मुद्दों को बेहद खूबसूरत तरीके से उठाया है । शब्दों की बानगी तुकबंदी के साथ-साथ&nbsp; रचनाओं की गेयात्मकता भी इनकी एक महत्वपूर्ण विशेषता है । ''बात निकली है तो बहुत दूर तलक जाएगी'' - निस्संदेह कहकशां मानवीय भावों के चितेरे इस रचनाकार की साहित्य के क्षेत्र को बहुत खूबसूरत भेंट है जो पाठकों के साथ एक लंबा सफर तय करेगी।</p><p>&nbsp;</p><p>-</p><p><i><strong>प्रस्तावना</strong></i></p><p>यदि हम वीर प्रकाश सिंह जी की शायरी को ध्यान से पढ़ें तो एक बात साफ़ नजर आती है कि यह शायरी आमद की शायरी है ना कि क़लम की। मेरा एक शेर है जो वीर प्रकाश सिंह जी की शायरी की ताईद करता है -</p><p>&nbsp;</p><p>चराग़ों में लहू जब डालता हूं शेर होता है</p><p>मशक़्क़त से ग़ज़ल का शेर तो हरगिज़ नहीं होता।</p><p>-</p><p><i>सागर सियालकोटी&nbsp;</i></p>
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