जब भी ज़हन में कोई ख़्याल आता है तो उस ख़्याल के अनेक बिंदु एक ही दूरी तय करते हैं जो तुम तक जाती हो उस ख़्याल की केन्द्र बिंदु तुम और तुम तक पहुँचने वाली इकाई मैं। परन्तु कुछ दूरियां और ख़्याल कभी तय नहीं हो पाते और रह जाते हैं कहानी बन कर और उन कहानियों और ख़यालों को सहज के रखना उतना ही कठिन है जितना कि किसी प्रेमी के द्वारा अपनी प्रेमिका की चोटी करने से पहले उस चोटी को तीन बराबर भागों में बाँटना। परंतु कोशिश तो की ही जा सकती जी जो मैंने भी की।