ख़यालो के फुल यह किताब सरल है या नहीं यह मुझे नहीं पता ; परंतु मै अपने दिल पर हात रख कर बता सकता हु की मैंने इस किताब मै अपना तन मन धन सब अर्पण किया है कई रातो तक जाग कर कल्पनाओ को वास्तविकता से जोड़ने का प्रयास किया है विलुप्त होने वाले सभी विचारो को फिर से पुनर्जीवित किया है मेरा मानना है की मानव जीवन के हर एक स्थिति को बारीकी से व्यक्त करने का यह विचित्र प्रयोग है मैंने अपने स्वार्थ को अपनी कविताओ मै हावी होने नहीं दिया बल्कि मैंने अपनी कविताओ को हर बंधन से आजाद कर दिया जहा पढने वालो को भी इसका एहसास होता रहेगा कविताओ मै कुछ बाते वास्तविकता से आगे की सोच रखती है जो की एक विचित्र परिस्थितियों का दर्शन करवाती है मै एक येसा कवी हु जिसे अपनी ही कवितओं की पंक्तियाँ याद नहीं रहेती इसी लिए कागज़ पर अपने ख़यालो के फूल बिखेरता रहेता हु किसी भी कविता का कोई अंत तय नहीं है वो अपने आप मै ही अमर है मेरी लिखावट एक छोटे बच्चे जैसी है जिसे हर कोई समझ नहीं सकता लेकिन फिर भी समझने की कोशीश ज़रूर कर सकते है गलतिया कई है और वो जानबूझ कर की है क्यों की इन्ही गलतियों मै जीवन की सिख है ख़यालो के फुल भी इन्ही गलतियों का परिणाम है जो आपको अपने जीवन मै एक नई उम्मीद दिला सकते है और मन को हलकी गुदगुली से प्रफुल्लित होने पर मजबूर कर देंगे शैलेंद्र गजानन मानतकर