Khuda Aur Visale Sanam II साहित्य की अन्य विधाओं में सक्रिय रहने के बावजूद मैंने खुद को कथाकार ही माना पिछले डेढ़ दशक में लिखी गई कुछ चुनिंदा लंबी कहानियों का संकलन है- खुदा और विसाले सनम यह कहानियां गांव और कस्बाई जीवन पर आधारित है जो कि अब पूरी तरह हाशिए पर है लेकिन इनमें महानगर की चमक-दमक के नीचे दबी हुई कराह और टीस भी है.l कहते हैं की कहानी सच को झूठ में लपेटकर कहने की कला है लेकिन यह रूमानियत अकहानी या नई कहानी की मुहिम की थी जो कि पूरी कहन सामने नहीं ला पाती थी l मेरे लिए कथा लेखन का ब्रह्म वाक्य सुप्रसिद्ध कथाकार डॉ रमेश उपाध्याय की कही बात है कि बदलते हुए यथार्थ को देखो यथार्थ को बदलने के लिए लिखो l ये कहानियां भारत के गांवों कस्बों के बदलते हुए यथार्थ के ना सिर्फ संग-संग चलती है बल्कि उन से जूझती भी है l खुरदरी यथार्थ की जमीन पर पनपी मगर आंखों में बदलाव का स्वप्न पालने को जूझ रही नायक नायिकाओं को यह कहानियां यथार्थ को कितना बदल पाएंगी यह निर्णय समय पर छोड़ना उचित होगा l मैं सुधि पाठकों को यह पुस्तक अर्पित करता हूं क्योंकि हर साहित्यकार की अग्नि परीक्षा पाठक ही लेते हैं l