ज़ाहिर है कवि का रास्ता आसान नहीं। फिर भी कवि अपना काम करता जाता है अपनी गति से और अपनी विनम्रता के साथ अपने होने के कारण तलाशता एक शिल्पी की तरह अपने आसपास की दुनिया को और तराशता उन द्वन्दों से जूझता जिन्हें आज के समय में कोई विशेष तवज्जो नहीं दी जाती और सरलीकरण की भेंट चढ़ा दिया जाता है। मुझे हमेशा लगता है कि कुमार मुकुल की कविताओं का पाठ करते हुए हमेशा इन संदर्भों को याद रखना चाहिए एक स्पष्ट विचारधारा के साथ एक निरगुनिए शिल्पी की तरह अपने काम में लगा हुआ कवि जो सुविधाजनक सहूलियतों से भरी इस दुनिया में आख़िरी आदमी के हक़ में एक विनम्र ढिठई के साथ खड़ा है। सबके लिए रोटी और चाँद के एक टुकड़े की माँग करता हुआ।