ये किताब मेरी ज़िंदगी के सफ़र का वो पड़ाव है जहाँ पहुँचकर मुझे अपने ख्वाबों को सच करने का एक नक्शा मिला है। मैंने जो लिखा है उसमें बहुत कुछ भोगा हुआ सच है कुछ अनुभव हैं और कुछ वंचना का दुःख भी है।सबकुछ सिमटकर एक किताब की शक्ल में मैं ही हूँ शुक्रिया।