1953 – 2021 श्री राधे श्याम सक्सेनाजी का जन्म दशहरे के पावन पर्व पर आगरा शहर में हुआ था। पेशे से वो इंजीनियर थे परन्तु युवावस्था से ही उनका झुकाव काव्य लेखन की तरफ था। बीएचईएल झांसी में कार्यरत रहने के दौरान भी उन्होंने अपने व्यस्त जीवन से कुछ समय अपनी रुचि को दिया तथा अनेक कविताओं गीतों गज़लों आदि की रचना की। उन्होंने अनेक मंचों पर अपनी रचनाओं को प्रस्तुत किया जिसके लिए उनको काफी सराहा गया। इसके अतिरिक्त उन्होंने विभिन्न विभागीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया तथा अनेक पुरस्कार अर्जित किए। सेवा निवृत्ति के बाद उन्होंने अपनी इस रूचि को अधिक से अधिक समय देने का प्रयत्न किया और अनेक मुक्तक छंद गज़लों कविताओं व गीतों की रचना की। अप्रैल 2021 के कोरोना काल में उनका असमायिक निधन हो गया। जिस कारणवश अपनी रचनाओं को एक संग्रह के रूप में प्रकाशित करने का उनका सपना अधूरा रह गया। यह पुस्तक उनकी अनेक कलाओं में लिखी गई रचनाओं का संकलन है। जो उनकी विभिन्न सामायिक विषयों के साथ-साथ उनकी पारिवारिक स्मृतियों को भी दर्शाती है। इस पुस्तक को प्रकाशित करवाना उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मीना सक्सेना व समस्त परिवार की उनके प्रति भावपूर्ण श्रद्धांजलि है। यह संग्रह उनके सपने को साकार करने का एक माध्यम मात्र है।