Kirnon Ki Pratiksha


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About The Book

About Bookरोजमर्या के जीवन में जो कुछ भी घटता है उसे काव्यात्मक संस्मरण जैसा उकेरदेने में आत्माराम यादव को महारत हासिल है। उनकी कविताओं में कहानियों ओर संस्मरणों की गहराई है जो किसी भी पाठक को आपाद मस्तक डुबो लेने में समर्थ ओर सक्षम है।वैसे तो “किरणों की प्रतीक्षा”” काव्य संकलन की सभी कविताए एक से बढ़कर एक है। गोस्वामी तुलसीदास महाराज की ये पंक्ति इन कविताओं के बारे में बड़ी सटीक बैठती है कि “”को बड़ छोट क़हत अपराधू।“” अर्थात कौन सी कविता अच्छी है ओर कौन सी साधारण यह कहना भी अपने आप में एक अपराध है क्योकि कवि के लिए तो वे अच्छी ही है तभी तो वे उन्हे लिपिबद्ध करने के लिए प्रस्तुत हुये। कवि के लिए तो उसकी तमाम कविताए एक सी ओर एक से बढ़कर एक ही होती है किन्तु पढ़ने के बाद जिन कविताओं ने मुझे अधिक प्रभावित उनमे से एक है- “”मैं एक ओर जनम चाहता हूँ”” कविता मुझे इसलिए अच्छी लगी क्योकि उसमें प्रेम की असफलता को बताया गया है ओर प्रेम की पूर्णता उसकी असफलता में ही निहित होती है। हीर राँझा सस्सी पुन्नु सोहनी महिवालशीरी फरियाद ओर लैला मजनू ऐसी ही प्रेम की जीवंत कविताए है।About Authorआत्माराम यादवसंपादक – बी॰पी॰पालीवालसहायक संपादक - लेखा यादव बीएससीपीजीडीसीए एलएलबीआवरण चित्र- (नर्मदा जी कोरीघाट होशंगाबाद का मनोरम दृश्य)आवरण चित्रकार/केमरामेन - हितेश थुदगर...फ्रेन्डस् स्टूडियो होशंगाबाद...प्रिय पिताजी श्रीजगन्नाथ यादवव ममतामयीमाताजी श्रीमति भागवती देवी यादवकेपावन चरणकमलों में सादर समर्पित।ये उनकी ही दुआयेँ है जहां-“”माता पिता के चहेरे परमैंने पढ़े हैसारे वेद-पुराणउनके चरणों मेंमेरा व्यक्तित्वसृजन कर रहा हैवेदनाओं-संवेदनाओं कोउनकी ममतामयी छाव मेंबितायें पलों मेंपीव मेरी कवितायें जन्म ले रही है।“”
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