तेरे ख़्वाबों की दस्तक पे दरवाज़ा खोलने के लिए मेरी सोई हुई आँखों में जागा रहता है कोई ज़रा आवाज़ सुनती हैं तो आँखें दौड़ पड़ती हैं बड़ी तेज़ी से फिर उस वक्त मेरा दिल धड़कता है धड़कते दिल की बैचेनी पे फिर तकिया लगाकर मैं कहानी इश्क़ की उसको सुना फिर से सुलाता हूँ मगर जिद्दी बड़ा है दिल कहाँ सोता है जगता है ।