वरिष्ठ कवि वीरेंद्र विश्नोई ‘सुमन’ ऐसे कवियों में शुमार किए जाते हैं जो ज़िंदगी की मुश्किलों को प्रेम में ढालकर कविता बना देते हैं। हालाँकि वीरेंद्र जी की कविताओं का फ़लक़ बहुत विस्तृत है जिसमें ज़िंदगी के तमाम मरहले शामिल हैं। उनके इस पहले काव्य संग्रह ‘कोई नहीं अधरों से कहता’ की काव्य पंक्तियों में प्रेम की पूर्णता की तलाश और एक भटकन तो है ही इस भटकन से निकलती एक राह भी है जो कविता को एक नया आयाम देने के लिए आतुर है। इस आयाम में उन विभिन्न विषयों का भी समावेश है जो मानवीय जीवन से जुड़े होते हैं।