कृपाशंकर चौबे बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं। वे पत्रकार हैं स्तंभकार हैं टिप्पणीकार हैं निबंधकार हैं साहित्य समालोचक हैं संपादक हैं अध्यापक हैं। साहित्य और पत्रकारिता के इस अध्येता का अध्ययन क्षेत्र चित्र कला रंगमंच और सिनेमा तक फैला है। प्रो. चौबे ने जिस तरह साहित्य और पत्रकारिता के अंतर्संबंध को मजबूती देने का यत्न किया उसी तरह उन्होंने साहित्य और पत्रकारिता को कलाओं से जोड़ा। उनके इस योगदान का आकलन इस ग्रंथ में किया गया है। कृपाशंकर चौबे के लेखन की विविधता भारत की विविधता जैसी है। इस पुस्तक में कृपाशंकर चौबे के वैविध्यपूर्ण लेखन का मूल्यांकन महाश्वेता देवी केदारनाथ सिंह हरिवंश पवन करण शेखर देशमुख अभिषेक श्रीवास्तव प्रभात ओझा डॉ. अर्चना शर्मा हीरालाल नागर निर्मला गर्ग मिथिलेश श्रीवास्तव शर्मिष्ठा बाग मृत्युंजय प्रो. वृषभ प्रसाद जैन अरुण होता प्रो. जय कौशल डॉ. सुरजीत कुमार सिंह पलाश विश्वास अग्निशेखर अरुण कुमार त्रिपाठी आर. के. त्रिपाठी ‘रुक्म’ विनय बिहारी सिंह अनय प्रो. गिरीश्वर मिश्र प्रो. बल्देव भाई शर्मा शंभूनाथ शुक्ल विकास मिश्र डॉ. एस. आनंद डॉ. अमिता सेराज खान बातिश राकेश प्रवीर अभिज्ञात प्रो. अमरनाथ शरद जायसवाल वीरेन्द्र प्रताप यादव संदीप सौरभ निर्भय देवयांश नामवर सिंह अक्षय चंद्र शर्मा राम बहादुर राय सुनील गंगोपाध्याय अनिर्वाण घोष और भवानी शंकर ने किया है। प्रो. चौबे के व्यक्तित्व को जानने-समझने की दृष्टि से डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र गोपाल राय अरविंद चतुर्वेद ओमप्रकाश अश्क कौशल किशोर त्रिवेदी डॉ. अखिलेश सिन्हा राजेश कुमार यादव प्रो. संजीव भानावत डॉ. अजय कुमार सिंह चाँदनी कुमारी नंदिनी सिन्हा और अमन आकाश के संस्मरण उपयोगी हैं।