कृष्ण गुरु भी सखा भी-: मनुष्य की जो चरम संभावना है वह ओशो में संभव हुई है। वे मनुष्य में बसी भगवत्ता के गौरीशंकर हैं। वे स्वयं भगवान हैं। ओशो श्री जगत और जीवन को उसकी परिपूर्णता में स्वीकारते हैं। वे पृथ्वी और स्वर्ग चार्वाक और बुद्ध को जोड़ने वाले पहले सेतु हैं। उनके हाथों पहली बार अखंडित धर्म का वैज्ञानिक धर्म का जागतिक धर्म का प्रसार हो रहा है। यही कारण है कि जीवन-निषेध पर खड़े अतीत के सभी धर्म उनके विरोध में संयुक्त होकर खड़े हैं। ओशो श्री व्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रथम मूल्य देते हैं। धर्म नहीं धार्मिकता उनका मौलिक स्वर है।उनके अब तक बोले वचनों की 500 पुस्तकें बन चुकी हैं | और दुनिया की 35 से अधिक भाषाओं में अनुवादित-प्रकाशित हो रही हैं। सारी दुनिया में श्रेष्ठतम वैज्ञानिक कलाकार और चैतन्य के खोजी ओशो द्वारा दिशा निर्देशित वर्ल्ड अकादमी ऑफ क्रिएटिव साइंस आर्ट्स एंड कान्शसनेस में सम्मिलित हो रहे हैं और अपनी सारी ऊर्जा को सुजनशील में नियोजित कर रहे हैं। हंसते-गाते उत्सव मनाते ये सृजनशील व्यक्ति क्षण-क्षण जीने की कला सीख रहे हैं और इसी दुनिया को स्वर्ग में ''रुपांतरित कर देने के आधार बन रहे हैं।मिट्टी के दीये-: कहानियां सत्य की दूर से आती प्रतिध्वनियां हैं: एक सूक्ष्म सा इशारा एक नाजुक सा धागा। तुम्हें खोजते रहना होगा। तब कहानी धीरे अपने खजाने तुम्हारे लिए खोलने लगेगी। यदि तुम कहानी को वैसे ही लो जैसी वह दिखाई देती है तुम उसके संपूर्ण अर्थ से ही चूक जाओगे। प्रत्यक्ष वास्तविक नहीं है। वास्तविक छिपा है. बड़े गहरे में छिपा है जैसे किसी प्याज में कोई हीरा छिपा हो। तुम उघाड़ते जाते हो उघाड़ते जाते होः प्याज की परतों पर परतें और तब हीरा उजागर होता हैओशपुस्तक के कुछ मुख्य विषय3बदुधार्मिक चित्त क्या है?सत्य की खोज में सर्वाधिक आवश्यक क्या है? महत्वाकांक्षा का मूल क्या हैमनुष्य का भय क्या हैउसकी चिंता क्या हैधर्म क्या है-जीवन क्या है प्रेम क्या है?