‘कृष्ण मेरा सखा’ में परमानंद स्वामी ने कृष्णावतार के रहस्य उनकी बाल लीलाओं गोपी चीरहरण राध-कृष्ण प्रेम-भक्ति महात्म्य तथा कंस वध् का वर्णन किया है। प्रसंग तो केवल माध्यम हैं परन्तु इन ग्रंथों में ईश्वर-भक्ति भक्तिमार्ग तथा भक्ति साध्ना का ही वर्णन किया गया है जो इस युग में दुर्लभ होती जा रही है। सम्पूर्ण ग्रंथ तात्विक सत्वों से परिपूर्ण है। लक्ष्मी के प्रश्न तथा नारद के उत्तर से साध्क के मन में आने वाले लगभग सभी प्रश्नों का हल श्री परमानंद स्वामी ने इस ग्रंथ के माध्यम से दिया है।