Krishan Sadhna Rahit Sidhi (कृष्ण साधना रहित सिद्धि) & Guru partap Sadh Ki Sangati
Hindi

About The Book

गुरु परताप साध की संगति :ओशो स्वयं तूफानों के पाले हुए थे। और उनका अक्षर-अक्षर मुहब्बत का दीया बनकरउन तूफानों में जलता रहा... जलता रहेगा। जिस ओशो से मैंने बहुत कुछ पाया है यह अक्षर उन्हीं के नाम- अर्पित करती हूं -कह दो मुखालिफ हवाओं से कह दो मुहब्बत का दीया तो जलता रहेगा...''अमृता प्रीतमकृष्ण साधना रहित सिद्धी :मनुष्य की जो चरम संभावना है वह ओशो में संभव हुई है। मनुष्य में बसी भगवत्ता के गौरीशंकर हैं। वे स्वयं भगवान हैं। ओशो श्री जगत और जीवन को उसकी परिपूर्णता में स्वीकारते हैं। वे पृथ्वी और स्वर्ग चार्वाक और बुद्ध को जोड़ने वाले पहले सेतु हैं। उनके हाथों पहली बार अखंडित धर्म का वैज्ञानिक धर्म का जागतिक धर्म का प्रसार हो रहा है। यही कारण है कि जीवन-निषेध पर खड़े अतीत के सभी धर्म उनके विरोध में संयुक्त होकर खड़े हैं। ओशो श्री व्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रथम मूल्य देते हैं। धर्म नहीं धार्मिकता उनका मौलिक स्वर है। उनके अब तक बोले वचनों की 500 पुस्तकें बन चुकी हैं और दुनिया की 35 से अधिक भाषाओं में अनुवादित प्रकाशित हो रही हैं। सारी दुनिया में श्रेष्ठतम वैज्ञानिक कलाकार और चैतन्य के खोजी ओशो द्वारा दिशा निर्देशित वर्ल्ड अकादमी ऑफ क्रिएटिव साइंस आर्टस एंड कान्शसनेस में सम्मिलित हो रहे हैं और अपनी सारी ऊर्जा को सृजनशील में नियोजित कर रहे हैं। हंसते-गाते उत्सव मनाते ये सृजनशील व्यक्ति क्षण- क्षण जीने की कला सीख रहे हैं और इसी दुनिया को स्वर्ग में रुपांतरित कर देने के आधार बन रहे हैं।
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