यह उपन्यास कृष्णा के जीवन की कहानी है। ईश्वर के प्रेम में डूबे और हृदय में ईश्वर से संवाद करने वाला कृष्णा जब उर्वी से मिलता है तो उसे ऐसा लगता है कि ईश्वर ने उर्वी को उसकी जीवन की सुंदरता को बढ़ाने के लिए भेजा है। प्रेम एक पवित्र भावना है। प्रेम की सकारात्मकता कृष्णा के जीवन की सुंदरता को बढ़ाती है। दूसरी ओर चंदा है जो कृष्णा को सबकुछ मान बैठी है। वह कृष्णा और उर्वी के प्रेम संबंध को अच्छी तरह से जानती है। प्रेम के प्रति उसका दृष्टिकोण भी बहुत व्यापक है। इन तीनों की कहानी में कई उतार चढ़ाव आते हैं किंतु अंततः प्रेम की जीत होती है। इस कहानी का उद्देश्य प्रेम का दर्शन प्रस्तुत करना है।