यह पुस्तक ईश्वर भक्ति और ईश्वरीय प्रेम को समर्पित है। यह भक्ति गीतों से ओतप्रोत है। जब आप पर प्रभु की कृपा होती है तो कुछ भी अचानक से नहीं होता; प्रभु के चमत्कार लगातार होते रहते हैं। इसी चमत्कार की वजह से मैं अपनी भक्ति और प्रेम को व्यक्त कर पाती हूँ। जब प्रभु अपनी कृपा करते हैं तो वे आपको हर गुण से तृप्त कर देते हैं। याद रहे श्री कृष्ण के पास सोलह कलाएँ हैं और जब आप प्रभु के करीब हो जाते हैं तो वे अपनी कलाओं का कुछ अंश आपको देने की कृपा करते हैं। कलियुग के तारणहार महा विष्णु भगवान कल्कि राम का प्रकाश होगा। प्रभु कल्कि को समर्पित मेरे भक्ति गीतों का यह संग्रह है। प्रभु जी अपने प्रेम से मुझे निहाल कर रहे हैं। मैं भक्ति गीत लिखती जा रही हूँ और प्रभु में ही खोती जा रही हूँ |